आयुर्वेद अनुसंधान अब 13 भाषाओं में उपलब्ध

आयुर्वेद अनुसंधान अब 13 भाषाओं में उपलब्ध

 

लोकतंत्र वाणी / संवाददाता

दिल्ली।आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा विकसित ‘अनुवादिनी एआई’ के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत साक्ष्य-आधारित आयुर्वेदिक अनुसंधान और शैक्षिक सामग्री को हिंदी सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे देशभर में इसकी पहुंच बढ़ेगी।
समझौते पर सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर वैद्य रबीनारायण आचार्य और अनुवादिनी एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर ने हस्ताक्षर किए। यह पहल उन्नत भाषा प्रौद्योगिकी और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान के समन्वय का उदाहरण है।
सीसीआरएएस देश के 25 राज्यों में 30 संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध करता है और उसका प्रमुख प्रकाशन ‘सीसीआरएएस बुलेटिन’ अभी मुख्य रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित होता है। अब अनुवादिनी एआई के माध्यम से इन शोध परिणामों और आईईसी सामग्री का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा, जिससे प्रामाणिक जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचेगी और भ्रामक सूचनाओं पर भी रोक लगेगी।
प्रोफेसर रबीनारायण आचार्य ने कहा कि यह सहयोग आयुर्वेद अनुसंधान को आम लोगों तक उनकी भाषा में पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर के अनुसार, यह तकनीक ज्ञान को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने में सहायक होगी।
भविष्य में इस पहल के तहत विदेशी भाषाओं में भी अनुवाद किया जाएगा, जिससे आयुर्वेद ज्ञान की वैश्विक पहुंच और मजबूत होगी।

 

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