युवाओं में बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा, जीवनशैली की ये गलतियां बन रहीं बड़ी वजह

युवाओं में बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा, जीवनशैली की ये गलतियां बन रहीं बड़ी वजह

पिछले कुछ वर्षों में युवाओं के बीच हार्ट अटैक के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। हैरानी की बात यह है कि 40 वर्ष से कम उम्र के ऐसे लोग भी दिल के दौरे का शिकार हो रहे हैं, जिनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल सामान्य रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रिपोर्ट्स का नॉर्मल होना दिल की सेहत की गारंटी नहीं है, बल्कि असली खतरा हमारी रोजमर्रा की आदतों में छिपा है।

इसी विषय पर डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को आगाह किया है। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक अब उम्र से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली की गंभीर गलतियों का नतीजा बनती जा रही है। लंबे समय तक बैठे रहना, अचानक भारी वर्कआउट, जिम सप्लीमेंट्स का अत्यधिक सेवन और बढ़ता प्रदूषण हृदय को समय से पहले कमजोर कर रहे हैं।

सेडेंटरी लाइफस्टाइल और अचानक भारी एक्सरसाइज से बढ़ता जोखिम

डॉक्टर शालिनी के अनुसार, रोजाना 8 से 10 घंटे लगातार बैठे रहना और फिर वीकेंड पर अचानक हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट या ट्रैकिंग करना हृदय के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। शरीर को जब धीरे-धीरे अनुकूल होने का मौका नहीं मिलता, तो रक्त धमनियों पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। इसके साथ ही जिम में इस्तेमाल होने वाले प्रोटीन पाउडर, एनर्जी बूस्टर और हार्मोन आधारित सप्लीमेंट्स ब्लड क्लॉटिंग और बीपी स्पाइक की आशंका को बढ़ा देते हैं, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं।

वायु प्रदूषण से दिल में मूक सूजन

खराब हवा और ट्रैफिक एक्सपोजर का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषण शरीर में ‘सिस्टेमिक इन्फ्लेमेशन’ यानी अंदरूनी सूजन पैदा करता है। यह सूजन धीरे-धीरे धमनियों को सख्त बना देती है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है। युवाओं में बिना किसी पूर्व चेतावनी के आने वाले हार्ट अटैक के पीछे यह एक बड़ा और अक्सर अनदेखा कारण है।

कम पानी और ज्यादा चाय-कॉफी से बढ़ती परेशानी

भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग पानी पीना नजरअंदाज कर देते हैं और चाय-कॉफी पर ज्यादा निर्भर हो जाते हैं। अत्यधिक कैफीन शरीर को डिहाइड्रेट करता है और दिल की धड़कन को प्रभावित करता है। पानी की कमी से खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे हृदय को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और लंबे समय में दिल की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।

बार-बार स्नैकिंग से बिगड़ता मेटाबॉलिज्म

दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते रहने की आदत मेटाबॉलिज्म को नुकसान पहुंचाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे आर्टरीज में सूजन बढ़ती है, जो आगे चलकर ब्लॉकेज का रूप ले सकती है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए अनुशासित खान-पान और नियमित दिनचर्या बेहद जरूरी है।

डॉक्टरों की सलाह है कि यदि कोई व्यक्ति इन आदतों को लगातार दोहरा रहा है, तो उसे समय रहते सतर्क हो जाना चाहिए। क्योंकि बाहरी तौर पर फिट दिखना ही पर्याप्त नहीं, असली सेहत हृदय और धमनियों की मजबूती में छिपी होती है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

(साभार)

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