मौसम बदलते ही क्यों बढ़ जाते हैं सर्दी-जुकाम के मामले? जानिए इसके कारण और बचाव के उपाय

मौसम बदलते ही क्यों बढ़ जाते हैं सर्दी-जुकाम के मामले? जानिए इसके कारण और बचाव के उपाय

फरवरी का महीना मौसम के लिहाज से संक्रमण के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है। दिन में तेज धूप और रात में अचानक बढ़ती ठंड शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है। तापमान में बार-बार होने वाला यह उतार-चढ़ाव वायरस और बैक्टीरिया के सक्रिय होने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है, जिससे सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल बुखार के मामलों में इजाफा देखने को मिलता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान हवा में नमी कम हो जाती है और धूल कणों की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे राइनोवायरस तेजी से फैलता है। यही वायरस सामान्य सर्दी और खांसी का प्रमुख कारण होता है। अक्सर लोग दिन की गर्मी को देखकर ठंडे पानी का सेवन शुरू कर देते हैं या गर्म कपड़े पहनना छोड़ देते हैं, लेकिन जैसे ही शाम होते-होते तापमान गिरता है, शरीर संक्रमण की चपेट में आ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो सामान्य सर्दी आगे चलकर फ्लू या वायरल फीवर का रूप ले सकती है। ऐसे में खान-पान, कपड़ों और दिनचर्या में थोड़े से बदलाव आपको बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं।

खान-पान में बरतें विशेष सावधानी

मौसम बदलने के साथ आहार में भी बदलाव जरूरी है। शरीर की गर्मी बनाए रखने और इम्यूनिटी मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। ठंडा पानी और फ्रिज में रखे खाद्य पदार्थों से परहेज करें। इसके स्थान पर गुनगुना पानी, तुलसी-अदरक का काढ़ा और हल्का सुपाच्य भोजन लाभकारी होता है। विटामिन-सी युक्त फल जैसे संतरा, नींबू और आंवला शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं और मौसमी बीमारियों से बचाव करते हैं।

कपड़ों को लेकर न करें लापरवाही

दोपहर की धूप देखकर पूरी तरह गर्म कपड़े छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। सुबह और शाम की ठंडी हवा शरीर को जल्दी प्रभावित करती है। चिकित्सकों की सलाह है कि लेयरिंग पद्धति अपनाई जाए, जिससे जरूरत के अनुसार कपड़े उतारे या पहने जा सकें। कान, गला और छाती को ढंककर रखने से ठंडी हवा के सीधे प्रभाव से बचाव होता है और जुकाम का खतरा कम रहता है।

स्वच्छता और सक्रिय जीवनशैली अपनाएं

संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बेहद जरूरी है। बाहर से लौटने के बाद हाथ साबुन से जरूर धोएं और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का उपयोग करें।
इसके साथ ही रोजाना हल्का व्यायाम, प्राणायाम या योग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। पर्याप्त नींद लें, क्योंकि नींद की कमी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देती है।

छोटी सावधानियां, बड़ा फायदा

मौसम का यह बदलाव भले ही सुहावना लगे, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही आपको लंबे समय तक बीमार कर सकती है। रात को समय पर सोना, घर का ताजा भोजन करना और गुनगुने पानी का सेवन जैसे छोटे कदम सर्दी-जुकाम से बचाने में बेहद कारगर हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज से बेहतर बचाव है, इसलिए बदलते मौसम में सतर्क रहें और स्वस्थ रहकर इस मौसम का आनंद लें।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।

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